विरोधी रेल अफसरों को धूल चटाने वाले पूर्व IRTS केएम त्रिपाठी आखिरकार CBI कोर्ट से हारे
IRCTC के पूर्व CRM को 3 साल की जेल, 14.75 लाख रुपये जुर्माना

टी. एन. मिश्र, लखनऊ
लखनऊ की CBI अदालत ने IRCTC के लखनऊ रीजनल ऑफिस के तत्कालीन चीफ रीजनल मैनेजर कृष्ण मोहन त्रिपाठी को आय से अधिक संपत्ति यानी Disproportionate Assets (DA) मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें तीन साल के कारावास और 14.75 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। CBI के मुताबिक, कृष्ण मोहन त्रिपाठी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला उस समय सामने आया था, जब एक अलग रिश्वतखोरी के मामले में उन्हें ट्रैप कर गिरफ्तार किया गया था।

भृष्ट अफसरों को लेनी चाहिए नसीहत
भारतीय रेल के चर्चित IRTS अधिकारी के.एम. त्रिपाठी के कभी रसूख की चर्चा रेलवे के गलियारों में खूब होती थी। उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में सीनियर डीसीएम और सीनियर डीओएम जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उनके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता था कि उनके फैसलों को लेकर बड़े अधिकारियों के स्तर तक चर्चाएं होती थीं। मनचाही पोस्टिंग और विभागीय पकड़ को लेकर भी उनके बारे में कई तरह की चर्चाएं होती रहीं। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनकी मजबूत नेटवर्किंग की भी चर्चा थी। लेकिन समय बदला और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला सामने आया। जांच और न्यायिक कार्रवाई के बाद उनकी नौकरी और प्रतिष्ठा दोनों पर बड़ा असर पड़ा। यह मामला उन अधिकारियों के लिए भी एक सबक है, जो पद और प्रभाव के दम पर नियमों को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं। आखिरकार सरकारी सेवा में पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियम और कानून से ऊपर कोई नहीं है।
31 अक्टूबर 2009 को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे
CBI के अनुसार, पूरा मामला वर्ष 2009 की एक रिश्वतखोरी की कार्रवाई से जुड़ा है। उस समय कृष्ण मोहन त्रिपाठी IRCTC लिमिटेड, लखनऊ के चीफ रीजनल मैनेजर के पद पर तैनात थे। 31 अक्टूबर 2009 को CBI ने उन्हें 70 हजार रुपये की कथित अवैध रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। यह कार्रवाई एक ट्रैप के तहत की गई थी।
रिश्वतखोरी के इस मामले की जांच के दौरान CBI को कृष्ण मोहन त्रिपाठी की संपत्तियों और आय से जुड़े ऐसे तथ्य मिले, जिनसे उनके पास ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति होने का संकेत मिला। इसके बाद एजेंसी ने मामले को आय से अधिक संपत्ति के एंगल से आगे बढ़ाया।
2010 में दर्ज हुआ था DA केस
CBI ने 24 फरवरी 2010 को कृष्ण मोहन त्रिपाठी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया। इसके बाद एजेंसी ने आरोपी की आय, संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
जांच का मुख्य आधार यह पता लगाना था कि आरोपी ने अपनी ज्ञात और वैध आय के मुकाबले कितनी संपत्ति अर्जित की और उस अतिरिक्त संपत्ति के स्रोत के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया या नहीं।
1.44 करोड़ रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति का मामला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने आरोपी की आय और संपत्तियों से जुड़े आंकड़े और दस्तावेज पेश किए। CBI के मुताबिक, कृष्ण मोहन त्रिपाठी के पास 1,44,02,221 रुपये की आय से अधिक संपत्ति पाई गई।
CBI ने अदालत को बताया कि यह संपत्ति आरोपी की कुल आय का 102.53 प्रतिशत थी। एजेंसी की जांच में सामने आए इन्हीं तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ DA मामले में मुकदमा चलाया गया।
2011 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
CBI ने जांच पूरी करने के बाद 13 दिसंबर 2011 को कृष्ण मोहन त्रिपाठी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में एजेंसी ने आरोपी पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया।
इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान CBI ने अपने आरोपों के समर्थन में संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए। अभियोजन पक्ष की ओर से रखे गए साक्ष्यों और दलीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत का फैसला
करीब 16 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद लखनऊ की CBI अदालत ने 10 अगस्त 2026 को कृष्ण मोहन त्रिपाठी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें तीन साल के कारावास की सजा सुनाने के साथ 14.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस फैसले के साथ रिश्वतखोरी के मामले से सामने आए आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।



