उत्तर रेलवे ने शुरू की रेलवे कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा
e-रेफरल प्रणाली से प्रक्रिया हुई पेपरलेस व पारदर्शी

लखनऊ, 08 जुलाई 2025
उत्तर रेलवे के रेलकर्मियों और पेंशनभोगियों को अब निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा आसान और सुलभ कर दी गई है। इसके तहत e-रेफरल प्रणाली की शुरुआत की गई है, जिससे रेफरल की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन और पेपरलेस हो गई है। लाभार्थियों को अब केवल UMID कार्ड और पंजीकृत मोबाइल नंबर के ज़रिए इलाज की सुविधा मिल रही है, वह भी बिना किसी कागजी झंझट के।

उत्तर रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कुलदीप तिवारी ने बताया कि इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा ने की। बैठक में अपर मंडल रेल प्रबंधक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, अन्य विभागीय अधिकारी और लखनऊ के सभी अधिपत्रित (empanelled) निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में अधिपत्रित अस्पतालों से अनुरोध किया गया कि वे रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करें और रेलवे लाभार्थियों को समय पर सहायता प्रदान करें।

कैशलेस उपचार के लिए आवश्यक दस्तावेज़:
1. UMID कार्ड/नंबर – प्रमुख पहचान दस्तावेज।
2. पंजीकृत मोबाइल नंबर – OTP इसी नंबर पर आएगा, जिससे इलाज शुरू किया जा सकेगा।
उपचार के तीन मार्ग:
1. आपात स्थिति में (कैशलेस):
सीधे किसी अधिकृत निजी अस्पताल में जाएं।
UMID कार्ड दिखाएं, OTP दें और इलाज शुरू कराएं।
अस्पताल को 24 घंटे के भीतर रेलवे अधिकारियों को सूचना देनी होगी।
2. रेफरल के माध्यम से (कैशलेस):
नज़दीकी रेलवे अस्पताल में चिकित्सक से परामर्श लें।
HMIS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रेफरल पत्र प्राप्त करें।
मनचाहे अधिपत्रित अस्पताल में इलाज कराएं।
3. सीधा निजी अस्पताल जाना (स्व-वित्तपोषित):
बिना रेफरल या आपात स्थिति के भी इलाज संभव है।
भुगतान स्वयं करना होगा, परंतु CGHS या न्यूनतम दरें लागू होंगी।
आपात स्थिति के संकेतात्मक उदाहरण:
हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, दुर्घटना, गंभीर रक्तस्राव, सांस की तकलीफ, करंट लगना, विष सेवन, आपात प्रसव आदि।
पेंशनर्स के लिए विशेष सुविधाएं:
70 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनर्स को विशेषज्ञ डॉक्टर से कैशलेस OPD परामर्श व जांच की सुविधा (31 अक्टूबर 2027 तक मान्य)।
कैंसर रोगियों को Tata Memorial जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में बिना रेफरल के प्रारंभिक जांच की सुविधा। एक रेफरल पर 90 दिनों में 6 बार परामर्श संभव।
सहायता केंद्र:
प्रत्येक अधिपत्रित अस्पताल में रेलवे लाभार्थियों हेतु विशेष सहायता काउंटर और नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
रेलवे प्रशासन द्वारा भी वरिष्ठ चिकित्सकों को समन्वय हेतु नामित किया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
सभी रेफरल पैन-इंडिया मान्य हैं।
इलाज संबंधित दस्तावेज अब पूरी तरह डिजिटल रूप से समन्वित किए जा रहे हैं।
SGPGI, लखनऊ में भर्ती मरीजों को भी कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।



