गोमतीनगर रेलवे स्टेशन की प्रीमियम कमर्शियल परियोजना में देरी से आवंटी परेशान, RLDA से कब्जा तिथि और मुआवजे की मांग
95% भुगतान के बावजूद तीन साल से नहीं मिला कब्जा, आवंटियों ने 18% वार्षिक ब्याज की उठाई मांग

लखनऊ, 06 अगस्त
विभूतिखंड स्थित गोमतीनगर रेलवे स्टेशन से जुड़ी आरएलडीए (RLDA) की प्रीमियम वाणिज्यिक परियोजना में लगातार हो रही देरी को लेकर आवंटियों ने गंभीर नाराजगी जताई है। आवंटियों का कहना है कि वर्ष 2020-21 में निर्माण आधारित भुगतान योजना (Construction Linked Plan) के तहत उन्हें दुकानें और शोरूम आवंटित किए गए थे। परियोजना के दोनों टावर R1 और R2 में करीब 150 से 200 आवंटी अपने आवंटित वाणिज्यिक स्थान की लगभग 95 प्रतिशत राशि जमा कर चुके हैं।
आवंटियों के अनुसार परियोजना का कब्जा 30 सितंबर 2023 तक मिल जाना था, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीतने के बाद भी न तो निर्माण कार्य पूरा हुआ है और न ही कब्जा सौंपा गया है। साथ ही अब तक किसी सक्षम अधिकारी की ओर से अंतिम कब्जा तिथि भी घोषित नहीं की गई है।

आवंटियों का आरोप है कि परियोजना में देरी के कारण उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई लोगों ने बैंक ऋण, सोना गिरवी रखकर, मकान बेचकर अथवा अपनी सेवानिवृत्ति निधि निवेश कर दुकानें खरीदी थीं, लेकिन समय पर कब्जा न मिलने से वे ईएमआई, किराया और अन्य वित्तीय दायित्वों का बोझ उठाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि कुछ आवंटी अवसाद, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं।

आवंटियों ने बताया कि परियोजना कार्यालय और नई दिल्ली स्थित RLDA कार्यालय को कई बार ईमेल के माध्यम से शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अधिकांश शिकायतों का कोई समाधान नहीं हुआ। मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया, जहां निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद प्रगति संतोषजनक नहीं है।

आवंटियों ने RLDA से परियोजना का शेष निर्माण युद्धस्तर पर पूरा करने, स्पष्ट कब्जा तिथि घोषित करने तथा 3 सितंबर 2023 के बाद की अवधि के लिए 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अलावा परिसर की सुरक्षा और साफ-सफाई के लिए एजेंसी नियुक्त करने, RWA गठन की अनुमति, हरित क्षेत्र विकसित करने, पानी एवं सीवरेज व्यवस्था बहाल करने, सभी आवंटियों को जमा धनराशि का अद्यतन विवरण उपलब्ध कराने तथा गोमतीनगर स्थित RLDA कार्यालय में स्थायी जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती की भी मांग उठाई गई है।



