परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह बोले—सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी से ही हादसों पर लगेगा अंकुश
“सड़क सुरक्षा संवाद” का आगाज़, स्काउट-गाइड से लेकर एनसीसी-एनएसएस तक युवाओं को जोड़ेगा अभियान

लखनऊ, 24 मार्च 2026
लखनऊ में आयोजित सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया और स्पष्ट कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सुनिश्चित हो सकती है। उन्होंने युवाओं, स्काउट-गाइड, एनसीसी और एनएसएस की भूमिका को अहम बताते हुए 2047 तक सुरक्षित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया। मंत्री ने बताया कि हर साल सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोगों की जान जाती है, जिसे कम करने के लिए सरकार 50 प्रतिशत कमी का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ जैसे नियमों के पालन की अपील की और कहा कि चालान का उद्देश्य जुर्माना नहीं, बल्कि जीवन बचाना है। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए प्रशिक्षुओं को सड़क सुरक्षा के नियमों और प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय “सड़क सुरक्षा संवाद” कार्यक्रम प्रदेश में सड़क सुरक्षा को जनांदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्काउट एवं गाइड, एनसीसी (NCC) और एनएसएस (NSS) जैसे युवा संगठनों को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़कर उन्हें जागरूक एवं संवेदनशील बनाना है।

कार्यक्रम में प्रदेश के परिवहन मंत्री, विशेष सचिव पीडब्ल्यूडी डॉ. प्रभात कुमार, भारत स्काउट एवं गाइड उत्तर प्रदेश के स्टेट चीफ कमिश्नर, आईआरटीई के अध्यक्ष डॉ. रोहित बलूजा तथा परिवहन आयुक्त किंजल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी को बेहद जरूरी बताते हुए युवाओं की भूमिका को अहम बताया।

इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए करीब 300 स्काउट-गाइड प्रशिक्षकों और 100 एनएसएस कैडेट्स को सड़क सुरक्षा के बुनियादी नियमों, दुर्घटनाओं से बचाव और हादसे की स्थिति में त्वरित प्राथमिक सहायता (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) की ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान कुल 7 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

कार्यक्रम की खास बात यह है कि प्रशिक्षित स्काउट-गाइड प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में जाकर स्कूल स्तर पर गठित इकाइयों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे सड़क सुरक्षा का संदेश गांव-गांव और स्कूल-स्कूल तक पहुंचेगा। इसके साथ ही एक प्रतियोगात्मक चरण के माध्यम से एनसीसी और एनएसएस के युवाओं को भी बड़े स्तर पर इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों के लिए क्विज सत्र भी आयोजित किए गए हैं, जिनके माध्यम से उन्हें सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी रोचक तरीके से दी जा रही है। साथ ही दुर्घटनाओं के पूर्व और बाद की परिस्थितियों, बचाव उपायों, यातायात नियमों के पालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।

परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री के नेतृत्व और परिवहन मंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए बहु-स्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं। “सड़क सुरक्षा संवाद” इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सड़क सुरक्षा का ब्रांड एंबेसडर बनाना है।

यह पहल न केवल युवाओं में जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि सामाजिक भागीदारी के माध्यम से सड़क हादसों में कमी लाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।



