विद्युत संविदा मजदूर संगठन उप्र की कार्यकारिणी बैठक
सरकार से वेतन बढ़ोतरी व नियमितीकरण समेत कई मांगें

लखनऊ, 22 फरवरी।
विद्युत क्षेत्र के संविदा कर्मियों के हितों को लेकर विद्युत संविदा मजदूर संगठन उप्र की कार्यकारिणी बैठक नरही स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन अध्यक्ष नवल किशोर सक्सेना ने की। इसमें संरक्षक वरिष्ठ मजदूर नेता आर. एस. राय, अरुण कुमार, प्रदेश प्रभारी पुनीत राय, राजेश्वर सिंह, सुनील सिंह, अशोक पाल, संजय सिंह, धनंजय राजभर, श्याम नारायण यादव, आनंद सिंह, विपिन विश्वकर्मा, सोहन मौर्य, प्रियांशु सिंह, अशोक कुमार गौड़िया, अंकित अस्थान, सत्येंद्र सिंह यादव, नरेश पाल सिंह, मुनीष पाल, अरविंद कुमार समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को आउटसोर्स कर्मचारी निगम में शामिल करने की मांग
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें मांग की गई कि ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मियों को आउटसोर्स कर्मचारी निगम में शामिल किया जाए। कार्य की जोखिमपूर्ण प्रकृति को देखते हुए अकुशल श्रमिकों के लिए ₹22,000 मासिक वेतन तय किया जाए। लाइनमैन, एसएसओ और कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए ₹25,000 मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग रखी गई। पांच वर्ष से अधिक सेवा कर चुके कर्मियों को नियमित करने की मांग उठी। छंटनी पर तत्काल रोक लगाने की बात कही गई। पिछले दो वर्षों में हटाए गए कर्मियों की पुनर्बहाली की मांग भी की गई। कार्य करने की आयु सीमा 60 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया।

2023 की हड़ताल के दौरान कार्यरत रहने के बावजूद हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस ले पावर कारपोरेशन
मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडेय ने कहा कि मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान कार्यरत रहने के बावजूद हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस लिया जाए। फील्ड कर्मचारियों के लिए फेशियल अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त की जाए। श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए। अकुशल श्रमिकों से जोखिम भरे कार्य न कराए जाएं।

संविदा कर्मियों के लिए स्पष्ट सेवा नियमावली बनाई जाए-पुनीत राय
प्रदेश प्रभारी पुनीत राय ने कहा कि संविदा कर्मियों के लिए स्पष्ट सेवा नियमावली बनाई जाए। वेतन का भुगतान आउटसोर्स एजेंसियों के बजाय सीधे विभाग द्वारा किया जाए। इससे पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित होगा।
दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
बैठक में सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई। आवश्यक सेफ्टी उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। दुर्घटना बीमा राशि ₹20 लाख करने की मांग भी उठी। बढ़ते कार्य के बावजूद हो रही छंटनी पर चिंता जताई गई। तय किया गया कि जिस जिले में छंटनी होगी, वहां संगठन लोकतांत्रिक तरीके से पूर्ण कार्य बहिष्कार पर विचार करेगा।



