आईआरआईटीएम लखनऊ में पर्पल फेस्ट ने समावेश, सम्मान और सशक्तिकरण का बिखेरा रंग
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने भारतीय रेल के राष्ट्र के विकास में योगदान लिए जताया आभार

टी एन मिश्र, लखनऊ
भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान (IRITM), लखनऊ में आयोजित पर्पल फेस्ट 2025 ने समावेशिता, गरिमा और सशक्तिकरण का शानदार संदेश दिया। भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में दिव्यांगजनों के कौशल, रचनात्मकता और उद्यमिता को मंच मिला। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।


“ पर्पल कलर समानता और आत्मविश्वास का प्रतीक” – डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि पर्पल रंग समानता, आत्मविश्वास और गरिमा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सहायक उपकरणों को “दान” नहीं बल्कि “सशक्तिकरण के साधन” के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने दिव्यांगजनों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में IRITM और भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की और इसे “समावेशिता की सच्ची मिसाल” बताया।

भारतीय रेल राष्ट्र की प्रगति की धड़कन है-ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारतीय रेल न केवल देश की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला भी है। उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क देश के कोने-कोने को जोड़ते हुए सामाजिक एकता, आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन का मजबूत माध्यम बना है। रेलवे की निरंतर आधुनिकता, सुरक्षा और जनसुविधा की दिशा में हो रहे प्रयास “विकसित भारत” के सपने को साकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय रेल केवल पटरियों पर चलने वाली गाड़ियां नहीं, बल्कि यह भारत की प्रगति, एकता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।”


“रेलवे समावेशिता के प्रति प्रतिबद्ध” – रंजन प्रकाश ठाकुर, महानिदेशक
कार्यक्रम का शुभारंभ IRITM के महानिदेशक रंजन प्रकाश ठाकुर द्वारा मुख्य अतिथि के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
उन्होंने कहा कि पर्पल फेस्ट भारतीय रेलवे की समावेशिता और सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और समाज में सम्मानजनक भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।


दिव्यांग कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
फेस्ट का सबसे आकर्षक पहलू रहा दिव्यांग कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुतियाँ। “We Are One” ग्रुप के ऊर्जावान नृत्य, उत्तरी व पूर्वोत्तर रेलवे के कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुतियाँ और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के छात्रों के गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल प्रतिभा का प्रदर्शन किया बल्कि यह भी साबित किया कि संवेदनशीलता और कला की कोई सीमा नहीं होती।


प्रदर्शनी में झलकी दिव्यांग उद्यमियों की रचनात्मकता
फेस्ट में लगे 11 स्टॉल्स ने दिव्यांगजन उद्यमिता की नई तस्वीर पेश की। बधिर महिला कल्याण फाउंडेशन के बेकरी उत्पाद, देवाशीष लघु उद्योग के हस्तशिल्प, शीला क्रिएशन (फुट आर्टिस्ट) की कलाकृतियाँ और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास केंद्र के सहायक उपकरणों ने सबका ध्यान खींचा। समापन सत्र में अपर महानिदेशक संजय त्रिपाठी ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा — “पर्पल फेस्ट 2025 समावेशिता, रचनात्मकता और समानता का प्रेरक उदाहरण बन गया है।” पर्पल फेस्ट में बड़ी संख्या में रेल अधिकारियों, शिक्षाविदों और राज्य सरकार के कई अफसरों ने भी हिस्सा लिया।



