मानसून सत्र में सांसदों से मिलेंगे कुली, राष्ट्रीय कुली मोर्चा की बैठक में हुआ फैसला
कुलियों ने की रेलवे की नौकरी व सामाजिक सुरक्षा की मांग

लखनऊ, 25 जून 2025
कुलियों को रेलवे की नौकरी देने और उनकी सामाजिक सुरक्षा का इंतजाम करने के सवाल पर जुलाई में शुरू हो रहे मानसून सत्र से पूर्व राष्ट्रीय कुली मोर्चा के पदाधिकारी सभी पार्टियों के प्रमुखों और सांसदों से मिलकर अपना पत्रक देंगे। उनसे कुलियों के सवालों को हल करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने का अनुरोध करेंगे। इस आशय का निर्णय राष्ट्रीय कुली मोर्चा की वर्चुअल बैठक में लिया गया।
मोर्चा के कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार लगातार ऐसी नीतियों को लेकर आ रही है, जिसके कारण कुलियों के रोजगार पर हमला हो रहा है। देश में कहीं माई कुली एप के जरिए निजी कंपनियों को काम दिया जा रहा है। कहीं ठेकेदारी में ट्राली प्रथा शुरू कर दी गई है और कहीं बैटरी रिक्शा संचालन के कारण कुलियों का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इन परिस्थितियों में कुलियों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भीषण महंगाई में अपने परिवार की जिंदगी को चला पाना बहुत ही दिक्कत तलब हो गया है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर कुलियों की मांग है कि उन्हें 2008 की तरह एक बार फिर केंद्र सरकार रेलवे की नौकरी में समायोजित करें।

बजट सत्र में संसद में रेल मंत्री ने कुलियों के सामाजिक सुरक्षा के लिए दिया था आश्वासन
मोर्चा के कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने बताया कि पिछले बजट सत्र में संसद में रेल मंत्री ने आश्वासन दिया था कि कुलियों के सामाजिक सुरक्षा के लिए जारी योजनाओं को कड़ाई से लागू किया जाएगा। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य, वर्दी, शेल्टर रूम की बेहतर व्यवस्था जैसे सवाल हल नहीं हुए हैं। इन सवालों को भी राष्ट्रीय कुली मोर्चा मजबूती से उठायेगा।
कुलियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं, तो देशव्यापी आंदोलन
मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर संसद सत्र में कुलियों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक का संचालन राष्ट्रीय कुली मोर्चा के चंदेश्वर मुखिया ने किया। बैठक में गुड्डू कुमार, दिनेश मुखिया, धर्मवीर, रामबाबू बिलाला, राम महावर, अनिल सांवले, राज कपूर, राजकुमार, राम प्रसाद यादव, चंद्रू चलवाडी, जफर खान उर्फ अमजद, राहुल, अरुण कुमार, कलीम मकरानी, मूलचंद, शेख रहमतुल्लाह, रामजन्म यादव, भवन यादव, कन्हैया ग्वाला, राजू कुमार राय, संजय पासवान, जितेंद्र डांगी, रमेश ठाकुर, रामा राव, करी कृष्णा आदि लोगों ने अपने विचार रखे।



