मध्यांचल डिस्कॉम में 30% संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू
4500 श्रमिकों की आजीविका संकट में, विद्युत संविदा मजदूर संगठन ने उठाया कड़ा कदम

लखनऊ, 07 मई।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा 30% आउटसोर्स संविदा कर्मियों की अचानक छंटनी के विवादास्पद निर्णय ने लगभग 4500 श्रमिकों और उनके परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। इस फैसले के विरोध में विद्युत संविदा मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश ने 07 मई 2025 से लखनऊ के निगम मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
छंटनी का निर्णय गैरकानूनी और जनविरोधी
विद्युत संविदा मजदूर संगठन के प्रभारी पुनीत राय ने बताया कि यह छंटनी न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की रोजगार नीति और मानवाधिकार मूल्यों का भी खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2017 की तुलना में प्रदेश में विद्युत खपत दोगुनी हो चुकी है। मध्यांचल डिस्कॉम में उपभोक्ताओं की संख्या 58 लाख से बढ़कर 1 करोड़ 10 लाख हो गई है। कार्यभार कई गुना बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या में कटौती अव्यावहारिक और जनविरोधी है।”

आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी
मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडे ने स्पष्ट किया कि यदि निगम प्रबंधन ने छंटनी का निर्णय तत्काल वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने कहा, “इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी। हम श्रमिकों के हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।”
श्रमिकों का दर्द: रोजी-रोटी का संकट
छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय उनके परिवारों के लिए आर्थिक त्रासदी लाएगा। एक संविदा कर्मी ने बताया, “हम दिन-रात मेहनत करके बिजली आपूर्ति सुचारू रखते हैं, लेकिन बदले में हमें बेरोजगारी दी जा रही है।”

निगम प्रबंधन पर सवाल
इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों, बल्कि उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ते कार्यभार के बीच कर्मचारियों की कमी से बिजली आपूर्ति और रखरखाव सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संगठन ने मांग की है कि निगम इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे।



