‘चिंतन’ व KGMU के संयुक्त आयोजन में विशेषज्ञों ने बताए वायु प्रदूषण के गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
KGMU में वायु प्रदूषण पर विशेष कार्यक्रम, मस्तिष्क और त्वचा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर मंथन

लखनऊ, 23 दिसंबर 2025।
चिंतन एनवायरनमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप द्वारा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के सहयोग से KGMU परिसर में “वायु प्रदूषण का मस्तिष्क एवं त्वचा स्वास्थ्य पर प्रभाव” विषय पर एक विशेष वैज्ञानिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वायु प्रदूषण को केवल श्वसन समस्या नहीं, बल्कि एक व्यापक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समझाना और इससे बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाना रहा।


वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों तक सीमित नहीं
कार्यक्रम में डॉ. वेद प्रकाश, विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर, KGMU ने बताया कि वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। डॉ. पारुल वर्मा, त्वचा रोग विशेषज्ञ ने कहा कि प्रदूषित हवा में मौजूद विषैली गैसें और सूक्ष्म कण त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करते हैं, जिससे समय से पहले झुर्रियां, पिग्मेंटेशन और त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरिश निगम ने बताया कि PM 2.5 जैसे सूक्ष्म कण रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार कर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. अमित आर्य ने लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क से स्मृति ह्रास और संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट की चेतावनी दी।





