राष्ट्रीय पुस्तक मेले में “पत्रकार से साहित्यकार” तक की प्रेरक यात्रा पर डॉ. के. विक्रम राव को किया गया याद
अभिनेता अनिल रस्तोगी से लेकर सूचना आयुक्तों और वरिष्ठ पत्रकारों तक ने साझा किए संस्मरण

लखनऊ, 14 सितंबर 2025
22वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में हिंदी दिवस के अवसर पर “डॉ. के. विक्रम राव: पत्रकार की यात्रा, साहित्यकार/लेखक तक” विषयक परिचर्चा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत इस विचार से हुई कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आत्मा की पहचान है। स्वर्गीय राव साहब की पत्नी और पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के. सुधा राव ने उनके साथ बिताए सात दशकों की स्मृतियाँ साझा कीं, जिससे आयोजन का भावपूर्ण आरंभ हुआ। हिंदी दिवस पर यह आयोजन न केवल राव साहब की पत्रकारिता और साहित्य साधना को श्रद्धांजलि बना, बल्कि नई पीढ़ी को यह संदेश भी दे गया कि शब्दों की सच्चाई और गहराई ही पत्रकार को अमर बनाती है।
फ़िल्म और रंगमंच पर उनकी गहरी पकड़-अनिल रस्तोगी, वरिष्ठ अभिनेता-रंगकर्मी
मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ अभिनेता-रंगकर्मी अनिल रस्तोगी ने कहा कि 1978 से राव साहब को जानने का सौभाग्य मिला। “फ़िल्म और रंगमंच पर उनकी गहरी पकड़ मुझे हमेशा चकित करती थी। बुंदेलखंड और गुजरात के अकाल पर उनके आलेख ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं।”
विक्रम राव ने हिंदी को दिया बहुआयामी स्वरूप- पी.एन. द्विवेदी, सूचना आयुक्त
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी ने उन्हें पितृ-स्वरूप बताते हुए कहा, “हर पत्रकार एक साहित्यकार होता है। विक्रम राव ने हिंदी को बहुआयामी स्वरूप दिया।” सूचना आयुक्त दिलीप अग्निहोत्री ने जोड़ा, “विक्रम राव स्वयं में पत्रकारिता के संस्थान थे। उनकी वाक्य रचना और शब्दों की पकड़ अद्वितीय थी।”

राव साहब अच्छे लेखकों को फोन कर देते थे बधाई- सुधीर मिश्रा , संपादक
संपादक सुधीर मिश्रा ने याद किया कि राव साहब अच्छे लेखकों को फोन कर न केवल बधाई देते थे, बल्कि रचनात्मक सुझाव भी देते थे। वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह ने कहा, “राव साहब को विषय को अलग दृष्टि से देखने का दुर्लभ वरदान मिला था। डॉ. लोहिया पर उनका शोध अप्रतिम है।”
IPS की नौकरी छोड़ यह साबित किया कि पत्रकार सबसे बड़ा-नवल कांत सिन्हा , वरिष्ठ पत्रकार
वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव ने उनके 62 वर्ष के पत्रकारीय अनुभव को “पत्रकारिता की साधना” कहा और बताया कि वे अंतिम दिन तक लिखते रहे। नवल कांत सिन्हा ने स्मरण किया कि राव साहब ने IPS की नौकरी छोड़ यह साबित किया कि पत्रकार सबसे बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि “सूखी खबर को रोचक बनाना उन्हें बखूबी आता था,”।
व्याकरण के प्रति सजग करने का उनका प्रयास अविस्मरणीय -शिवशरण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक
परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शिल्पी सेन ने किया। उन्होंने राव जी की कई प्रसिद्ध टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को वर्तनी और व्याकरण के प्रति सजग करने का उनका प्रयास अविस्मरणीय है। कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक शिवशरण सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



