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ओमवीर सिंह थे निष्ठा और पेशेवर उत्कृष्टता की मिसाल

दूरदर्शिता, पेशेवर कौशल और टेलीकॉम सेक्टर की बारीकियों पर थी उनकी गहरी पकड़

टी एन मिश्र

भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में एक लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने वाले और बीएसएनएल के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (CGM) रहे ओमवीर सिंह की 73 साल की उम्र में बुधवार दोपहर निधन की ख़बर ने अनेक सहकर्मियों और दूरसंचार जगत के लोगों को स्तब्ध कर दिया है। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों और संवेदनाओं की बाढ़ से उनके योगदान और लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

ओमवीर सिंह का पेशेवर सफ़र दूरसंचार सेवा के बदलते दौर का प्रतिबिंब रहा। उन्होंने दूरसंचार विभाग कानपुर में वर्ष 1974 में ADET से नौकरी ज्वाइन की थी। अलीगढ़ के मूल निवासी ओमवीर सिंह TDM मेरठ, जीएम उत्तराखंड, PGM लखनऊ टेलीकॉम, सीजीएम बिहार और सीजीएम यूपी ईस्ट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे। उनकी यात्रा मेहनत, लगन और उत्कृष्ट नेतृत्व की कहानी कहती है। वह BSNL के सीजीएम से जनवरी 2012 में सेवानिवृत्त हुए थे। जिन लोगों ने उनके साथ काम किया, वे उनकी कार्यशैली, अनुशासन और कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को हमेशा याद रखेंगे।

बीएसएनएल के पूर्व सीजीएम ओमवीर सिंह की दूरदृष्टि को याद करता टेलीकॉम जगत

बीएसएनएल के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) ओमवीर सिंह के निधन की खबर ने दूरसंचार जगत में शोक की लहर दौड़ा दी है। सोशल मीडिया पर मिल रही श्रद्धांजलियों के बीच उनके कार्यकाल की कई यादें ताज़ा हो रही हैं। विशेष रूप से 19 जनवरी 2011 का दिन, जब देश में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) लागू होने से एक दिन पहले उन्होंने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। मै उस समय हिन्दुस्तान अखबार में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर उनसे रूबरू था। मेरे बगल में जीएम अतुल शर्मा बैठे थे। उस प्रेस वार्ता में ओमवीर सिंह ने भविष्यवाणी की थी कि “नंबर पोर्टेबिलिटी के बावजूद बीएसएनएल का नुकसान एक प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।” उस समय निजी मोबाइल कंपनियों के बढ़ते प्रभाव और ग्राहक खींचने की आक्रामक रणनीतियों को देखते हुए यह दावा कई लोगों को साहसिक लगा था। उद्योग जगत को आशंका थी कि सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के ग्राहक बड़ी संख्या में निजी कंपनियों की ओर रुख करेंगे। लेकिन आने वाले वर्षों में उनका यह अनुमान लगभग पूरी तरह सही साबित हुआ। नंबर पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद बीएसएनएल को अपेक्षाकृत बहुत कम नुकसान हुआ और ग्राहकों का पलायन एक प्रतिशत से भी कम रहा। सीनियर PGM अतुल शर्मा बताते हैं कि  यह सिर्फ उनका आत्मविश्वास नहीं, बल्कि वर्षों का अनुभव और बाजार की गहरी समझ थी।
ओमवीर सिंह की यह दूरदर्शिता उनके पेशेवर कौशल और टेलीकॉम सेक्टर की बारीकियों पर पकड़ को दर्शाती है।

बीएसएनएल को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने और सेवा सुधार की दिशा में किए कई नवाचार

जिस समय देश में टेलीकॉम क्षेत्र में निजी कंपनियों की चुनौती तेज़ थी, उस कठिन दौर में उन्होंने बीएसएनएल को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने और सेवा सुधार की दिशा में कई नवाचार किए। उनका योगदान केवल तकनीकी और प्रबंधन तक सीमित नहीं था। पूर्व सीजीएम सतीश कुमार बताते हैं कि वे नए अधिकारियों को मार्गदर्शन देने में विशेष रुचि रखते थे। नये अधिकारियों को वे न केवल पेशेवर दक्षता बल्कि सेवा-भाव और ईमानदारी का महत्व भी समझाते थे। यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका प्रभाव संगठन के भीतर महसूस किया जाता रहा। लोगों से उनका संपर्क लगातार बना रहा।

मजबूत नेतृत्व, दूरदृष्टि और परिश्रम से कठिन समय में भी बीएसएनएल को आगे बढ़ाया 

आज जब डिजिटल क्रांति और निजी क्षेत्र की तेज़ प्रगति ने सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के लिए चुनौतियां खड़ी की हैं, ओमवीर सिंह का जीवन हमें याद दिलाता है कि मजबूत नेतृत्व, दूरदृष्टि और ईमानदार परिश्रम से किसी भी संस्था को कठिन समय में भी आगे बढ़ाया जा सकता है। राजधानी के महानगर इलाके में रहने वाले स्वर्गीय ओमवीर सिंह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। पत्नी के साथ उनके दो बेटे और बहुएं हैं। हम सभी उनके परिजनों और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। यह लेख उन तमाम लोगों की श्रद्धांजलि का ही एक रूप है, जिन्होंने ओमवीर सिंह को सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा के रूप में देखा।

उच्च वावहारिक जीवन के साथ साथ सह वर्कर्स को देते थे परस्पर प्यार आदर व सम्मान  -एके जैन, पूर्व सीजीएम/पीजीएम 

पूर्व सीजीएम/पीजीएम एके जैन बताते हैं कि वह उच्च वावहारिक जीवन के साथ साथ सह वर्कर्स को परस्पर प्यार आदर व सम्मान देते थे। अपने प्रतिद्वंदी के प्रति भी प्यार भाव रखते थे। उसके कठिन समय में उसे गाइड करने की उनकी आदत उन्हें महान बनाती है। वह उत्तर प्रदेश टेलिकॉम के एक विशाल नायक थे।मैंने उनके साथ कई इंपोर्टेंट प्रोजेक्ट्स मैं काम किया। हर समय वह प्रोजेक्ट की बेहतरी के लिए हर संभव सहयोग के लिए तत्पर रहते थे।

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