राष्ट्रीय सम्मेलन में लखनऊ की महापौर ने रखा सशक्त नगर निकायों और महिला नेतृत्व का पक्ष
शहरी विकास और महिला सशक्तिकरण पर दो दिवसीय विमर्श में लखनऊ से प्रभावशाली सहभागिता

लखनऊ, 03 जुलाई 2025
हरियाणा के मानेसर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स में गुरुवार से शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय शहरी स्थानीय निकाय अध्यक्ष सम्मेलन में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर निकायों के सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। आयोजन में देशभर के महापौर, पार्षद, जिला परिषद अध्यक्ष, नगर विकास अधिकारी और शहरी नियोजन विशेषज्ञ शामिल हुए। लखनऊ नगर निगम से पार्षद शैलेंद्र वर्मा और अपर नगर आयुक्त ललित कुमार ने भी सहभागिता की।
राष्ट्रीय शहरी स्थानीय निकाय अध्यक्ष सम्मेलन में पहले दिन के सत्र
3 जुलाई को पहले दिन “शहरी विकास में स्थानीय निकायों की भूमिका”, “लोकतंत्र को मजबूत करने में नगर निकायों का योगदान”, और “शहरी प्रशासन में नवाचारों” जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और नगर विकास मंत्री विपुल गोयल सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और नीति-निर्माता मंच पर उपस्थित रहे।



महापौर सुषमा खर्कवाल ने लखनऊ नगर निगम की हालिया उपलब्धियों को किया साझा
महापौर सुषमा खर्कवाल ने लखनऊ नगर निगम की हालिया उपलब्धियों को साझा किया—जिसमें 1200 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों से कूड़ा प्रबंधन, स्मार्ट टॉयलेट्स, डिजिटल टैक्स कलेक्शन, ओपन जिम, वॉटर एटीएम और नागरिक सहभागिता ऐप्स जैसे नवाचार शामिल हैं। उन्होंने शिवरी सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की हाईटेक तकनीक और लखनऊ को Zero Waste City बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने 74वें संविधान संशोधन के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग करते हुए नगर निगमों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता, वित्तीय अधिकार और प्रशासनिक संरचना में मजबूती दिए जाने की आवश्यकता जताई।


महिला सशक्तिकरण सत्र में नेतृत्व भूमिका
सम्मेलन के दूसरे सत्र “महिलाओं के सशक्तिकरण के साधन के रूप में शहरी स्थानीय निकाय” विषय पर महापौर मुख्य अतिथि रहीं। इस सत्र में रचना शर्मा (निदेशक, लोकसभा सचिवालय) और अंबिका मजूमदार (अध्यक्ष, नगांव नगर पालिका बोर्ड, असम) विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। महापौर ने कहा, “भारत की महिलाएं अब केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि नीति निर्धारण की दिशा तय करने वाली निर्णायक बन चुकी हैं।” उन्होंने बताया कि देश में करीब 46% पार्षद महिलाएं हैं जो शहरी विकास की प्राथमिकताओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामुदायिक कल्याण की ओर अग्रसर कर रही हैं।


महिला जनप्रतिनिधियों को दिखाई भविष्य की दिशा
महापौर ने महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और तकनीकी सशक्तिकरण देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण का सुझाव दिया और कहा कि राजनीतिक दलों को महिला नेतृत्व को संसाधन और अवसर देने चाहिए।



