चलते चलते यह गीत याद रखना…कभी अलविदा न कहना-एके मिश्रा
बीएसएनएल के पूर्वी उत्तर प्रदेश परिमंडल को ऐसे अफसरों की दरकार

लखनऊ, 01, फरवरी।
भारतीय संचार निगम लिमिटेड एक इतनी बड़ी कंपनी है कि जिसमें हजारों सीनियर अफसर और लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं। वह दिन रात काम करके विभाग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है। उनमें से पूर्वी उत्तर प्रदेश परिमंडल के सीजीएम रहे एके मिश्र सर्किल सबसे आगे है। विभाग में मंडल अभियंता से शुरू की नौकरी का पड़ाव उन्होंने पूर्वी परिमंडल के मुख्य महाप्रबंधक की जिम्मेदारी निभानी के साथ खत्म की। लेकिन एके मिश्रा ने अपने रिटायरमेंट की पार्टी में जोश भरा और जय बीएसएनएल व हर घर बीएसएनएल जैसे नारे लगाए। उन्होंने कहा कि जब तक जान है हम सब बीएसएनएल के साथ हैं।
काश, यही जज्बा बीएसएनएल के हर कर्मचारी में हो और वह उपभोक्ता को अपने केंद्र में रखकर पूरी नौकरी करें तो पूरा विश्वास है कि बीएसएनएल को देश की नंबर वन कंपनी बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। बस जरूरत है उसमें एके मिश्रा जैसे जुनून की। हर समय काम करने की लगन की, उपभोक्ताओं की शिकायत सुनकर उनकी समस्या दूर करने की। बतौर पत्रकार मैं उनसे कैसरबाग के मंडल अभियंता की तैनाती के दौरान पहली बार मिला था। उस समय में दैनिक जागरण अखबार का पत्रकार था। मुझे पहली ही मुलाकात में ही उनकी वर्किंग से लगाव हो गया। उसके बाद वह डीजीएम बने। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर वह जीएम और पीजीएम बने। केरल से लौटने के बाद पहले उन्होंने बतौर पीजीएम सर्किल में जिम्मेदारी संभाली। पहले कार्यवाहक सीजीएम और फिर एमसी सिंह के जाने के बाद उन्होंने पूर्णकालिक सीजीएम की कुर्सी संभाली।

मुझे याद है कि एके मिश्रा को विभाग ने जो भी जिम्मेदारी सौंपी उन्होंने उसमें जान फूंकने की पूरी कोशिश की। जब मोबाइल सेवाओं के दुर्दिन चल रहे थे और उस समय वह मोबाइल सेवा में जीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जब मैं उनसे मिला तो शायद कमरे में वह शान शौकत नहीं दिखाई दी। जो पहले होती थी फिर भी उन्होंने तमाम बातें कहीं और कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि बीएसएनएल फिर पूरी ताकत से उठकर खड़ा होगा। लोगों में अपनी पहचान बनाएगा यह वह समय था कि जब संचार मंत्रालय बीएसएनल को तवज्जो नहीं दे रहा था। वह निजी मोबाइल ऑपरेटरों को बढ़ाने में जुड़ा हुआ था। फिर इसके बाद वह केरल चले गए वहां भी हम लोगों का मोबाइल के जरिए संपर्क बना रहा। केरल से लौटकर जब वह लखनऊ आए तो फिर उन्होंने नए सिरे से अपनी जिम्मेदारी संभाली। कुछ महीने पहले जब सीजीएम बने तो उन्होंने सीजीएम दफ्तर की रौनक लौटाने, उसकी गरिमा बहाल करने, और कार्य पद्धति विकसित करने में जुट गए। उन्होंने पुराने पत्रकारों को भी जोड़ा, पुराने ग्राहकों को जोड़ने के लिए भी पूरी कोशिश की।

अपनी टॉप लेबल टीम के साथ वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। इसके बाद वह पूरी टीम के साथ गवर्नर से भी मिले। कई विभागों के विभागगाध्यक्षों के साथ उन्होंने बीएसएनएल की सेवाओं को नए सिरे से चालू करने पर भी बात की। उन्होंने बीएसएनएक के उन अफसरो में भी हौसला भरा, जो हतोत्साहित थे। जिन्हें लग रहा था कि अब बीएसएनएल में कुछ होने वाला नहीं है लेकिन फिर भी एके मिश्र ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने अपनी पूरी ताकत से सर्किल को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 30 दिसंबर की बात है वह महानगर टेलीफोन एक्सचेंज में 70 किलोवाट के सोलर पैनल का उद्घाटन करने गए थे। तब भी मुझे वहीं से कॉल की लेकिन मेरा लाइव चल रहा था जिससे मैं उनका फोन नहीं उठा सका। फ्री होते ही मैने कॉल की तो उन्होंने महानगर टेलीफोन एक्सचेंज आने का आग्रह किया। मैं जब उनके पास पहुंचा तो उन्हें देखकर कतई नहीं लगा कि यह व्यक्ति कल रिटायर होने जा रहा है। वह इस जुनून से कम कर रहे थे कि जैसे उन्हें विभाग में लंबी नौकरी करनी है। अफसरों से बीएसएनएल को काफी आगे ले जाने की योजनाओं पर चर्चा करते रहे। चाहे टेलीफोन एक्सचेंज की मेंटेनेंस की बात हो या फिर टॉयलेट के नए स्वरूप की। वह सीनियर पीजीएम अतुल शर्मा, पीजीएम राजेश कुमार और नीतीश सिन्हा के साथ पूरे मनोयोग से भविष्य की कार्य प्रणाली बनाते हुए दिखाई दिए। इतना ही नहीं उन्होंने आम लोगों में बीएसएनएल के प्रति लगाव को जागृत करने के लिए सेल्फी पॉइंट्स बनाने पर भी जोड़ दिया।

जय बीएसएनएल, हर घर बीएसएनएल:एके मिश्र
शुक्रवार को जब इंदिरा नगर टेलीफोन एक्सचेंज के सभागार में उनकी फेयरवेल हुई तो वहां भी उन्होंने बीएसएनल को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर ही बात की। सभी को एक दूसरे से जुड़कर पूरी टीमवर्क को मजबूत कर काम करने के लिए तैयार रहने को कहा। खुद उन्होंने कभी अलविदा न कहना जैसे गाने पर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने जय बीएसएनएल, हर घर बीएसएनएल जैसे नारे भी लगाए। मेरा मानना है कि बीएसएनएल फिर उठकर खड़ा हो रहा है तो उसे ऐसे अफसरों की दरकार है की जो अपनी जेबें भरने के बजाय विभाग की बेहतरी के लिए काम करें। ईमानदारी से काम के साथ ही उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुने और उन्हें बेहतर नेटवर्क और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराएं। जिससे फायदे के सीढ़ियों पर पहुंचा बीएसएनएल और आगे बढ़े। फायदा सैकड़ों करोड़ तक सीमित न रहे बल्कि हजारों करोड़ तक पहुंचे। मुझे पूरी उम्मीद है की ऐसे ही बीएसएनएल अधिकारी आगे आकर एके मिश्र सरीखे अफसरों से सीख लेंगे और उनकी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाएंगे।



