‘चिंतन’ के शाहजहांपुर मॉडल से देशभर में स्वच्छ हवा की उम्मीद
पराली जलाने की घटनाओं में 67 प्रतिशत की कमी, किसानों की मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने पर जोर

टी. एन. मिश्र, लखनऊ
पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने की दिशा में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से सामने आया सकारात्मक अनुभव अब देशभर के लिए मिसाल बन सकता है। शाहजहांपुर में पराली जलाने की घटनाओं में 67 प्रतिशत की कमी के अनुभव को व्यापक स्तर पर अपनाने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसी उद्देश्य से लखनऊ स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय में स्वच्छ वायु और पराली प्रबंधन को लेकर विशेषज्ञों, अधिकारियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने मंथन किया।

चिंतन संस्था की संस्थापक निदेशक भारती चतुर्वेदी और कोऑर्डिनेटर डॉ. भाव्या सिंह की पहल पर आयोजित इस चर्चा में शाहजहांपुर के किसानों के प्रयासों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने और सफल अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। कार्यक्रम में फाउंडिंग एडिटर ऑन एयर निधि जामवाल, स्मार्ट सिटी एवं नगर निगम के अधिकारी तथा पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए।
किसानों की पहल से प्रदूषण पर लगाम लगाने की कोशिश
चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पराली जलाने की समस्या का समाधान केवल नियमों और प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि किसानों की भागीदारी, जागरूकता और व्यावहारिक विकल्पों से संभव है। फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाकर वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि पराली जलने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को जागरूक करने, स्थानीय प्रशासन की भागीदारी बढ़ाने और पराली के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
स्थानीय प्रयासों को राष्ट्रीय अभियान से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम में ग्रीन लॉन्च के माध्यम से स्वच्छ वायु का संदेश आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उद्देश्य पराली प्रबंधन के सफल प्रयासों को व्यापक पर्यावरण अभियान से जोड़ना और किसान समुदाय, स्थानीय निकायों, विशेषज्ञों तथा सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करना रहा। इस अवसर पर ऑन एयर मासिक पत्रिका का विमोचन भी किया गया।

शाहजहांपुर में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी के अनुभव को दूसरे कृषि प्रधान क्षेत्रों तक पहुंचाने की पहल को स्वच्छ हवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सफल मॉडलों को अपनाकर और किसानों को समाधान का भागीदार बनाकर पराली प्रबंधन की मुहिम को देशव्यापी स्वरूप दिया जा सकता है।



