लखनऊ के आरडीएसओ परिसर में ‘सर्व 58वीं राजधानी’ दुर्गा पूजा का भव्य शुभारंभ
पंडाल में दिखी बंगाली कला व 'आदि बांग्ला' संस्कृति की झलक

लखनऊ, 16 अक्टूबर
राजधानी लखनऊ के आलमबाग स्थित अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) परिसर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सर्व 58वीं राजधानी दुर्गा पूजा का आयोजन हर्षोल्लास और पारंपरिक भव्यता के साथ शुरू हो गया है। लगभग 58 वर्षों की अटूट सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए यह महोत्सव लखनऊ के सबसे प्रतिष्ठित और भव्य आयोजनों में से एक है।

डीजी प्रभास दनसाना और ज्योति दनसाना ने किया उद्घाटन
इस वर्ष के भव्य महोत्सव का आधिकारिक उद्घाटन आरडीएसओ के महानिदेशक प्रभास दनसाना और रेलवे महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा ज्योति दनसाना के साथ मिलकर संयुक्त रूप से किया। मुख्य अतिथियों ने मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और आरती उतारकर इस पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ किया। इस पूरे भव्य कार्यक्रम का संयोजक ए.पी. सिंह के कुशल संयोजन में संपन्न हुआ।

वरिष्ठ पदाधिकारियों और विशिष्ट अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
उद्घाटन समारोह के अवसर पर के पूर्व डीजी एच.एस. पन्नू विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने आरडीएसओ परिवार की इस सांस्कृतिक एकता की सराहना की। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में अध्यक्ष डॉ. एस मुंशी और देवेन्द्र जीतू ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

पंडाल में दिखी बंगाली कला व ‘आदि बांग्ला’ संस्कृति की झलक
समिति के सचिव एस. सेन गुप्ता की देखरेख में इस वर्ष पंडाल को बंगाल की पारंपरिक लोक विरासत और शिल्पकला से खूबसूरती से सजाया गया है। पंडाल के भीतर स्थापित मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा को पारंपरिक ‘आदि बांग्ला’ स्वरूप में तैयार किया गया है।
समिति के वरिष्ठ सदस्यों नीलाद्रि सेन गुप्ता, ए.के. सिकदर और हिमाद्रि सेन गुप्ता ने बताया कि उत्सव के दौरान हर शाम धुनुची नाच, बंगाली लोक नृत्य और डांडिया जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जा रहा है। महाषष्ठी से लेकर महानवमी तक प्रतिदिन दोपहर में विशाल ‘महाभोग’ (पारंपरिक खिचड़ी और लाबड़ा प्रसाद) का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ शामिल हो रहे हैं।



