आरडीएसओ में बीआईएम आधारित परियोजना प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू
रेलवे की 514 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी में एआई और डिजिटल तकनीक की भूमिका पर मंथन

लखनऊ, 15 अक्टूबर
अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), लखनऊ की ओर से भारतीय रेल की निर्माण परियोजनाओं में बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम) आधारित परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली (पीएमआईएस) के कार्यान्वयन पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 15 अक्टूबर 2026 को हुआ। 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में क्षेत्रीय रेलवे, रेलवे बोर्ड तथा रेलवे के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 40,000 किलोमीटर क्षेत्र में फैली करीब 8.31 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 514 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, रेल पटरियों का दोहरीकरण, सुरक्षा सुधार और आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। कार्यशाला का उद्देश्य परियोजना प्रबंधन में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना तथा विभिन्न संगठनों के अनुभव साझा करना है।

इस अवसर पर आरडीएसओ के अपर महानिदेशक काजी मेराज अहमद ने महानिदेशक प्रभास दनसाना, रेलवे बोर्ड के अपर सदस्य/कार्य राजेश अग्रवाल तथा अन्य अधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने बीआईएम तकनीक के माध्यम से परियोजना प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला में परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी, निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्यों का आकलन, ई-कवच के माध्यम से रिपोर्टिंग, रनिंग अकाउंट (आरए) बिलों का सत्यापन और निर्माण स्थलों से मोबाइल एप्लिकेशन द्वारा जानकारी जुटाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए कार्यों की प्रगति का आकलन, चैटबॉट से परियोजना संबंधी सूचनाओं की उपलब्धता तथा संसाधनों के बेहतर नियोजन पर भी विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में बीआईएम आधारित पीएमआईएस प्लेटफॉर्म को भारतीय रेल की परियोजना स्वीकृति एवं प्रबंधन प्रणाली (आईआरपीएसएम) से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। इस एकीकरण से परियोजना संबंधी सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा और आंकड़ों की दोहरी प्रविष्टि कम होगी। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि डिजिटल तकनीक और समन्वित कार्यप्रणाली अपनाने से रेलवे परियोजनाओं की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी, प्रभावी तथा समयबद्ध हो सकेगा।



