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रेठ नदी तट पर 44वें सेवा के महाकुंभ का शुभारंभ, 17 दिनों में 4000 निःशुल्क सर्जरी का लक्ष्य

रोगहरण श्रीहनुमान जी की छत्रछाया में सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम

बाराबंकी, 28 दिसंबर

रेठ नदी के तट पर स्थित हढ़ियाकोल के घने जंगलों में, परम योगी बाबा बद्रीदास जंगली बाबा की तपस्थली और वीतरागी संत स्वामी रामदास जी महाराज एवं स्वामी रामज्ञान दास जी महाराज की कर्मस्थली में आयोजित होने वाले 44वें सेवा के महाकुंभ का शुभारंभ 28 दिसंबर 2025 को भव्य रूप से हुआ। यह आयोजन साक्षात विराजित रोगहरण श्रीहनुमान जी की छत्रछाया में मानव सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

श्रीराम वन कुटीर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष भगवानदास जी महाराज ने अस्पताल परिसर में स्थापित मंदिर कक्ष में हनुमान जी, स्वामी विवेकानंद जी और स्वामी रामदास जी महाराज के चित्रों पर माल्यार्पण कर ऑपरेशन शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। इसके पश्चात उन्होंने ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में जाकर पूजन किया तथा विभिन्न जिलों से उपचार के लिए आए मरीजों का हालचाल जाना।

आश्रम के सेवादार मनीष मेहरोत्रा ने बताया कि यह देश का संभवतः पहला ऐसा चिकित्सा आयोजन है, जिसमें 17 दिनों के भीतर लगभग 4000 सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की जाती हैं। इस महाअभियान में डॉक्टरों और मरीजों के बीच किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन नहीं होता। देश के विभिन्न राज्यों से आए सेवाभावी डॉक्टर अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर यहां मरीजों को रोगमुक्त कर उनके जीवन में नई उम्मीद भरते हैं।

शिविर के निदेशक एवं प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.के. झापरवाल (उदयपुर) ने बताया कि यह आश्रम उनके जीवन के लिए ऊर्जा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि जनवरी माह में वे स्वयं को “चार्ज” करने के लिए यहां आते हैं। रोगहरण श्रीहनुमान जी को आधार मानकर किए गए ऑपरेशन आज तक शत-प्रतिशत सफल रहे हैं। उन्होंने याद करते हुए कहा कि यह शिविर कभी पेट्रोमैक्स की रोशनी, लकड़ी के ऑपरेशन टेबल और साधारण बिस्तरों से शुरू हुआ था, जो आज 300 बेड के अत्याधुनिक अस्पताल का रूप ले चुका है। यह सब हनुमान जी की कृपा और अद्भुत प्रबंधन का परिणाम है।

सेवादारों के अनुसार, इस सेवा महाकुंभ की ख्याति अब प्रदेश और देश की सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। मरीजों की सेवा के लिए विभिन्न राज्यों से सेवादार पूरे परिवार के साथ यहां पहुंच रहे हैं। श्रद्धा, सेवा और समर्पण से जुड़ा यह आयोजन न केवल चिकित्सा जगत में मिसाल बन रहा है, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा का संदेश भी दे रहा है।

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