क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में हिंदी कार्यशाला, औषधीय पौधों की उपयोगिता पर हुई चर्चा
“पासपोर्ट एवं औषधीय पौधे: स्वस्थ भारत से स्वस्थ विश्व की ओर” रहा कार्यशाला का विषय

लखनऊ, 19 अगस्त।
राजधानी लखनऊ के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में प्रत्येक बुधवार को “विश्व बंधुत्व श्रृंखला” का आयोजन किया गया।इसके अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की कड़ी में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “पासपोर्ट एवं औषधीय पौधे: स्वस्थ भारत से स्वस्थ विश्व की ओर” रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा मुख्य वक्ता रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ज्ञानवीर सिंह ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेदिक औषधियों का विदेशों में निर्यात लगातार बढ़ रहा है और सीमैप जैसे केंद्रीय संस्थान इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने औषधीय पौधों के महत्व और इनके माध्यम से स्वस्थ भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. राजेश वर्मा ने विभिन्न औषधीय एवं उपयोगी पौधों की जानकारी देते हुए उनके औषधीय गुणों और दैनिक जीवन में उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने औषधीय पौधों को तैयार करने की विभिन्न पद्धतियों की जानकारी भी दी। कार्यशाला के दौरान उन्होंने रोचक जानकारी साझा करते हुए बताया कि पौधों का भी पासपोर्ट बनाया जाता है, जो देखने में पोस्टकार्ड जैसा होता है। इसमें संबंधित पौधे की वैज्ञानिक जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज होते हैं, जिससे उसकी पहचान एवं वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने औषधीय पौधों, मानव उपवन तथा पौधों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मुख्य वक्ता के साथ संवाद भी किया गया और प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ के परिसर में “चंदन” के पौधे का रोपण किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के संवर्धन का संदेश भी दिया।



